इतिहास

सोनीपत नाम संस्कृत शब्द से अपनाया गया है जिसका अर्थ है संस्कृत भाषा में सुवर्णप्रस्थ (सोने की जगह) । एक लोकप्रिय परंपरा यह मानती है कि यह महाभृत में उल्लेखित पांच पाट या प्रस्थों (इंद्रप्रस्थ, पानीपत, तलपत, भघपत और सोनीपत) में से एक है, जो युधिष्ठिर ने दुर्योधन से मांग की थी । ये अर्जुन के तेरहवें वंश के वंशज राजा सोनी के बारे में बताता है ।

नई दिल्ली से उत्तर में 43 किमी दूर स्थित इस नगर की स्थापना संभवतः लगभग 1500 ई.पू. में आरंभिक आर्यों ने की थी। यमुना नदी के तट पर यह शहर फला-फूला, जो अब 15 किमी पूर्व की ओर स्थानांतरित हो गई है। हिन्दू महाकाव्य महाभारत में इसका ‘स्वर्णप्रस्थ’ के रूप में उल्लेख है। शहर में ‘अब्दुल्ल नसीरुद्दीन की मस्जिद’ (1272 में निर्मित), ‘ख़्वाजा ख़िज़्र का मक़बरा (1522 या 1525 ईसवी में निर्मित)’ और पुराने क़िले के अवशेष है।यहाँ पर हिन्दुओं का बाबा धाम मंदिर प्रसिद्ध है। सोनीपत दिल्ली से अमृतसर को जोड़ने वाले रेलमार्ग पर स्थित है। लोग काम के लिए रोज़ाना सोनीपत से दिल्ली आते-जाते हैं।

सोनीपत के जिला बनाये जाने का इतिहास बहुत ही नया है, सोनीपत पहले रोहतक जिले की तहसील हुआ करती थी, परन्तु प्रशासनिक समस्याओ के चलते २२ दिसंबर १९७२ में सोनीपत को एक पूर्ण जिला बना दिया गया था।