शामलात भूमि से नाजायज कब्जे को हटाना
शामलात भूमि से नाजायज कब्जे को हटाने के लिए हरियाणा पंचायती राज
एक्ट 1994, हरियाणा पब्लिक परमिसिज एक्ट 1972 एंव पंजाब विलेज कामन लैण्ड
एक्ट 1961 में व्यापक प्रावधान है।
उद्देश्यः-
इसका उद्देश्य पंचायती, सरकारी जन सम्पत्ति को खुर्द-बुर्द होने से
बचाना व ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद इत्यादि को हुए नुक्सान की
भरपाई करवाना है। इसके साथ ही गांव में पशु खड़े होने, बच्चो के खेलने,
यातायात में रूकावट हटाना तता अच्छे माहौल को बनाए रखना है।
गलत धारणाएं-
यह धारणा शामलात भूमि पर लागू नही होती कि शामलात भूमि पर गिरदावरी
या छत बना देने से कब्जा पक्का बन जाता है। इस प्रकार से रिकार्ड से केस पर
कोई प्रभाव नही पड़ता क्योंकि सिविल वानून में अवैध तथा गलत कब्जा होने से
मलकियत पर कोई प्रभाव नही पड़ता। सिविल अदालतों में इस प्रकार के केंसो के
लम्बित होने से कोई फर्क नही पड़ता क्योंकि ऐसे मुकदमें सिविल कोर्ट के
क्षेत्राधिकार से बाहर है।
कब्जों को दूर करने का प्रावधानः-
हरियाणा पंचायती राज एक्ट की धारा 24 के तहत ग्राम पंचायत स्वंय
अवैध कब्जो को नोटिस देकर हटवा सकती है तथा यदि कब्जा धारक कब्जा न छोडे तो
पंचायत पुलिस की सहायता से कब्जा करने वाले खर्च पर कब्जा हटवा सकती है।
विलेज काम लैण्ड एक्ट की धारा 7(2) के तहत कोई भी ग्रामवासी,
बी.डी.पी.ओ. समाज शिक्षा एंव पंचायत अधिकारी या ग्राम सचिव, सहायक कलैक्टर
(DDPO/SDM/CTM/DRO) की अदालत में अर्जी पर 15 रूपये की कोर्ट फीस/टिकट
लगाकर, थोडे समय में फैंसला किया जाता है तथा 5000/- से 10000/- रूपये
प्रति हैक्येटर की दर से नाजायज कब्जा करने वालों को जुर्माना लगाया जा
सकता है।
फैंसला होने के बाद पुलिस की मदद से कब्जा तुरन्त छुड़वा लिया जाता है।
पब्लिक परमिसिज एक्ट के तहत धारा 4,5,7 व 8 के तहत नाजायज कब्जों की
दरखास्त कलैक्टर (एस.डी.एम.) की अदालत में लगायी जाती है। इस अदालत द्वारा
भी इन मामलो में फैंसले कम से कम समय में दिए जाते है।
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 447 के तहत यदि कोई कब्जा लेने के
उपरान्त दुबारा शामलात भूमि पर कब्जा करे तो पुलिस में मामला दर्ज करवाया
जा सकता है। तथा भूमि पर नाजायज दखल करने वालो को दण्डित करवाया जाता है।
नोटः-
1. यदि आम रास्ते में रूकावट न हो तो कलैक्टर रेट से कब्जा हुई जमीन की
कीमत भरवाई जा सकती है।
2. यदि कब्जा वाली भूमि पर पुराना निर्माण हो तथा कोई कानूनी अडचन न हो तो
कब्जा धारक से पंचायत बदले में भूमि ले सकती है।
3. यदि ग्राम पंचायत चाहे तो जनहित में अवैध कब्जे की सम्भावना से निपटने
के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृती से ऐसे परिसर/भूमि को खुली बोली पर बेचा जा
सकता है।
4. पंचायत मुकदमें की पैरवी के लिए सरकारी वकील की निःशुल्क सेवाऐं ले सकती
है तथा यदि चाहे तो प्रस्ताव पास कर अपने खर्चे पर गैर सरकारी वकील भी
मुकर्रर कर सकती है।
सम्पर्कः-
कानून अधिकारी
जिला विकास एंव पंचायत अधिकारी कार्यालय
लघु सचिवालय, सोनीपत फोन 2220588