मिनी डेयरी योजना
उद्देश्यः
1. ग्राणीण क्षेत्र के शिक्षित बेरोजगार युवक/युवतियों के लिए स्व-रोजगार के अवसर जुटाना।
2. आर्थिक रूप से पिछडे गरीब परिवारो के लिए स्व-रोजगार जुटाना व उनकी आर्थिक दशा में सुधार।
3. दूध उत्पादन बढाने के लिए तकनीकी जानकारी व प्रसार शिक्षा देना।
पात्रः-
1. लाभग्राही की उम्र 18 से 50 वर्ष होनी चाहिए
2. सामान्य एंव पिछडे वर्ग के लिए हिन्दी का ज्ञान होना चाहिए
3. अनुसूचित जाति, विधवा व भूतपूर्व सैनिको के लिये हिन्दी का व्यवहारिक ज्ञान अनिवार्य।
4. कम से कम 11 दिन का डेयरी व्यवसाय में प्रशिक्षण
5. ग्रामीण क्षेत्र का निवासी होना अनिवार्य है।
योजनाः
दुधारू पशु संख्या        वर्ग           इकाई लागत रूपयो में
1. 10 दु.पशु           सामान्य/पिछड़ा  1,92,000
2. 5 दु.पशु.           सामान्य/पिछडा    93,000
3. 3 दु.पशु.     '      अनुसूचित वर्ग     49,800
4. 3 दु.पशु.           सामान्य/पिछडा    49,800
5. 3. दु.पशु.           विधवा औरत      49,800
जरूरी कागजातः
एक दिन की ट्रेनिंग कि लिएः
       1. दो फोटो पासपोर्ट साईज
       2. शैक्षणिक योग्यताओं की फोटो कापी
       3. ट्रेनिंग फार्म-1
       4. राशन कार्ड की फोटो कापी
ऋण के लिए फाईल तैयार करनाः
       1. फोटो, पासपोर्ट साईज -2
       2. ट्रेनिंग सर्टिफिकेट फोटो कापी-2
       3. 10 व 5 दु.पशु. के लिए क्रमशः दो व एक एकड़ की फर्द-2
       4. राशन कार्ड व फोटो पहचान पत्र की फोटो कापी-2
अनुदानः
       अनुसूचित जाति/विधवाओं के लिए-
1.      1000/- रूपये मार्जिन मनी अनुदान व 1000 /-रूपये पशु आवास स्थान की मुरम्मत आदि के लिए अनुदान के रूप में सम्बन्धित बैंक को ईकाई स्थापना से पुर्व भुगतान किया जाता है।
2.     5 वर्ष कर 2.25 प्रतिशत बीमा अनुदान व समस्त ब्याज राशि का 50 प्रतिशत भुगतान अनुदान के रूप में लाभग्राही के खाते में जमा करवा दिया जाता है।
नोटः- जिला डेयरी विकास अधिकारी द्वारा ब्याज राशि का अनुदान के रूप में भुगतान तभी किया जायेगा जब लाभ प्राप्तकर्ता, ऋण वसूली किश्तों की समय पर अदायगी करता रहेगा।
तकनीकी शिक्षा व दवाईयां इत्यादिः
       लाभ प्राप्तकर्ताओं को तकनीकी शिक्षा व पशुओं की दवाईयां अदि निःशुल्क दी जाती है।
एम.एम.पी.ओ.-1992
       दूध की गुणवत्ता कायम रखने के लिए इस एक्ट के अन्तर्गत दूध में कृत्रिम दूध की मिलावट रोकी जाती है।
कैटलफीड़ एक्टः
       इस एक्ट के अन्तर्गत विभाग द्वारा खल, बिनौला व सरसों की खल के विक्रेता व निर्माताओ के तीन वर्ष के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट बनाया जाता है। इसमें कार्यालय से 20 रूपये का फार्म लेकर रिटेलर को 500 /-रूपये तथा मैनुफक्चरको 1000/- रूपये बैंक में चालान फार्म के साथ जमा करवाना है। हैड आफिस से एक माह में रजिस्ट्रेशन बनकर आ जाता है।
दुग्ध - प्रतियोगिताः
       इस प्रतियोगिता में विभाग द्वारा खण्ड स्तर पर समय-समय पर दुग्ध प्रतियोगिता करवाई जाती है, जिसमें अच्छी दुधारू भैंस का कम से कम 12 किलोग्राम व अच्छी दुधारू गाय का दूध कम से कम 10 किलोग्राम होना चाहिए। विभाग की तरफ से प्रथम पुरस्कार विजेता को ईनाम के रूप में 1000/- रूपये की राशि दी जाती है। दूसरे विजेता को ईनाम राशि 600 /-रूपये दी जाती है। तीसरे विजेता को ईनाम के रूप में 400 /-रूपये दिये जाते है।
सम्पर्कः-
       जिला डेयरी विकास अधिकारी            फोनः   2220170
       सोनीपत