प्रधान मन्त्री रोजगार योजना
उद्देश्यः-
देश की कुल बेरोजगारी में लगभग 40 प्रतिशत शिक्षित बेरोजगार है। इस
योजना का सम्बन्ध औघोगिक सेवा ओर व्यापार के माघ्यम द्वारा स्ंवयं उधम
स्थापित करना है।
पात्रता-
कोई भी बेराजगार जो 8वीं या 10वीं पास हो या आई.टी.आई.पास हो,
वे
लोग जिन्होने 6 महीने का कोई सरकारी टैक्नीकल कोर्स किया हो,
इस
योजना में ऋण का पात्र है। आयु सीमा 18 से 35 वर्ष रखी गई है परन्तु
अनुसूचित जाति,
अपंग,महिलाओं
तथा भूतपूर्व सैनिकों के लिये 10 साल की छूट रखी गई है वह व्यक्ति कम से कम
3 वर्ष तक उस एरिया का स्थाई निवासी होना चाहिये उसके परिवार की कुल आय 40,000/-
रूपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिये इसके लिये परिवार का अर्थ है
लाभार्थी के माता पिता और पति-पत्नी तथा पारिवारिक आय में सभी स्त्रोत
जैसे मजदूरी,वेतन,पैशन
क़षि ,व्यापारक
किराया आदि शामिल होगे वह किसी राष्ट्रीय बैंक,स्त्रोत
वितिय संस्थान,
सरकारी बैक का चूककर्ता नहीं होना चाहिये महिलाओं,
अनुसूचित जाति को प्राथमिकता दी जाती है।
परियोजना लागत:-
इस योजना
के अन्तर्गत उधोग लगाने का इच्छुक व्यक्ति 2 लाख रूपये तक का ऋण
प्राप्त कर सकता है। व्यापार ओर सेवा में यह सीमा एक लाख रूपये हैं इस
योजना के अन्तर्गत पोल्ट्री,
सूअर,
पालन,
डेयरी आदि के लिये ऋण उपलब्ध है।
मार्जन मनी बैंक ऋण :-
उधमियों को प्रतिशत से 16.25 मार्जन मनी के रूप में लगाना होगा यह राशि
अनुदान व मार्जन की कुल लागत मिलाकर 20 प्रतिशत से अधिक न हों ।
जमानत:
कर्जा के लिये जमानत की आवश्यकता नहीं होगी केवल कर्जे से बनी
सम्पतियां ही बैंक के पास धरोहर रखी जा सकेंगी। उद्यौगों के सम्बन्ध
में 2 लाख तक कोई प्रति भुति गारन्टी देनी होगी ।
सरकारी अनुदान:-
भारत सरकार उधमियों को परियोजना लागत का 15 प्रतिशत सरकारी अनुदान
के स्प में देगी जिसकी अधिकतम 7500/- रूपये होगी। यदि एक से अधिक उघमी
भागीदार में एक परियोजना लगाते हैं तो उस मामले में सहायता की राशि प्रति
व्यक्ति अधिक से अधिक 7500/ रूपये होगी।
ट्रेनिंग:-
चुने गये उधमियों को व्यापार तथा सेवा के लिये 7 से 10 दिन तक
उधोग के लिये 15 से 20 दिन तक की ट्रेंनिग दी जाती है।
जरूरी कागजात:-
1 प्रार्थना पत्र 2 आयु का प्रमाण पत्र 3 योग्यता प्रमाण
पत्र
4 राशन र्काड 5 रोजगार कार्यालय का र्काड 6 फोटो 7 हल्फिया
ब्यान
उक्त सभी
दस्तावेज प्रार्थी को सत्यापित करवा कर दोहरी प्रति में जिला उधोग
केन्द्र के कार्यालय देने होंगे।
जिला
उधोग
केन्द्र
इनको
क्रमवार
अपने
रजिस्टर
में
दर्ज
करेगा। और
उनको टी.एफ.सी के
सम्मुख
प्रस्तूत
करेगा। टी.
एफ.सी.
की
अध्यक्षता
महाप्रबन्धक,
जिला
उधोग
केन्द्र
द्वारा की
जायेगी
जिसमें
अग्रणी
जिला
प्रबन्धक,रोजगार
अधिकारी,
लघु
संस्थानों के
प्रतिनिधियों
तथा
बैंकों के
अधिकारी
भाग
लेंगें।
उसके
पश्चात केस
बैंक
में
भेज
दिया
जाता है और
बैंको
द्वारा
वितिय
सहायता
प्रदान की
जाती
है।
उधोग,
व्यापार
व
सेवा
उपक्रम:-
इस
योजना के
अधीन
तमाम तरह के
उधोग,
व्यापार व
सेवा
उपक्रम
लगाये जा
सकते है।
जिनमें से
कुछ की
सूची
नीचे दी गई
है।
उधोग:-
आरा
मशीन,
आटा
चक्की/
मसाला/
बेशन
चक्की,स्टील
फर्नीचर,
गेट
ग्रिल/
प्लास्टिक/रबड की
वस्तुऐं/
जूते,
चमडे की
वस्तुऐं/
हौजरी की
वस्तुऐं
बनाना,
मोमबतियां/
चाक/अगरबतियों
बनाना/
लकडी की
वस्तुऐं/
फर्नीचर/बुग्गी
बनाना,बिजली कर
सामान/सिवच
बोर्ड
रसायन/साबुन/डिट्रजैन्ट
बनाना,पोल्ट्री/डेयरी
वस्तुऐं/आईसकैण्डी
बनाना,सर्जिकल
बैंडेज,
लैदर
बैल्ट,
सीमेन्ट
जाली,
लेन्स
ग्राईडिंग,
पोट्री,
नमकीन
बनाना
आदि ।
व्यापार:-
आयुर्वेदिक
दवाइयों की
दुकान,
फुल-रस की
दुकान,
केरोसिन की
दुकान,
स्कूटर
पार्टस की
दुकान,
पंतंग
डोरी की
दुकान
सपोर्टस की
दुकान,
स्टील
बर्तनों की
दुकान
पनवाडी की
दुकान,
चाय की
दुकान,
स्टेशनरी
स्टोर,
उन
बुनने की
दुकान,
करियाणा/
कपडे की
दुकान,
बिल्डिग
मैटिरियल की
दुकान,
फल व
सब्जी की
दुकान
आदि।
सम्पर्क:
महा
प्रबन्धक
फोन : 2243034
सोनीपत
अथवा
खण्ड स्तर
अधिकारी (उधोग)
सभी
खण्डो
में।